1. परिचय
भारत के उत्तर-पूर्वी भाग में स्थित झारखण्ड जहाँ क्षेत्रफल की दृष्टि से देश में 15वें स्थाप
पर है, वहीं जनसंख्या की दृष्टि से 13वें स्थान पर है। राज्य की भूगर्भिक संरचना में
प्राचीनतम आर्कियनकालीन चट्टान पाये जाते हैं, वहीं नवीनतम चतुर्थकल्पकालीन जलोढ़ निशेषण
भी। इस राज्य के धरातलीय स्वरूप के निर्माण में छोटानागपुर पठार की सर्वप्रमुख भूमिका है,
जो प्रायद्वीपीय पठारी भाग का उत्तर-पूर्वी खण्ड है। झारखण्ड की नदियां बरसाती नदियां है।
झारखण्ड के पठारी क्षेत्र में अनेक जलप्रपात हैं। राज्य में अनेक गर्म जलकुंड हैं जिनके
रोगनाशक शक्ति पायी जाती है। झारखण्ड की जलवायु उष्णकटिबंधीय मानसूनी प्रकार की है।
झारखण्ड में पायी जाने वाली मिट्टी अवशिष्ट मिट्टी है। राज्य के कुल क्षेत्रफल के 29.61% भाग
में वन पाये जाते हैं।
पठारी क्षेत्र होने के कारण झारखण्ड में कृषि योग्य भूमि बहुत ही कम है। सिंचाई साधनों
के विस्तार के लिए सिंचाई परियोजनाएं चलाई जा रही हैं। बहुउद्देश्यीय नदी घाटी परियोजनाओं
में दामोदर घाटी परियोजना एवं स्वर्णरेखा नदी परियोजना महत्त्वपूर्ण हैं। राज्य में अनेक ताप
विद्युत् एवं जल विद्युत् परियोजनाएं चलाई जा रही हैं। खनिज संसाधन की दृष्टि से झारखण्ड
भारत का सबसे धनी प्रदेश है। झारखण्ड को 'भारत का रूर प्रदेश' कहा जाता है। वस्तुतः यहाँ
की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार खनिज व उन पर आधारित उद्योग ही हैं। यहाँ चार प्रमुख
औद्योगिक केन्द्र हैं जमशेदपुर, राँची, बोकारो व धनबाद झारखण्ड में सड़क, रेल व वायु
परिवहन उपलब्ध हैं। जनगणना 2011 के अनुसार झारखण्ड की कुल जनसंख्या 3, 29, 88, 134,
जनसंख्या घनत्व 414 प्रति वर्ग किमी., दशकीय जनसंख्या वृद्धि दर 22.42%, लिंगानुपात 947
एवं साक्षरता दर 66.41% है। झारखण्ड एक ग्रामीण क्षेत्र बहुल राज्य है। यह एक हिन्दू बहुल
राज्य है।
राज्य की कुल जनसंख्या का लगभग एक चौथाई भाग (26.2%) अनुसूचित जनजातियों का
है। अभी तक झारखण्ड की 32 जनजातियों को अनुसूचित जनजाति घोषित किया जा चुका
झारखण्ड में धर्मों की बहुरंगी छटा मिलती है। झारखण्ड की सर्वप्रमुख भाषा हिन्दी है। इसके
अलावा संथाली, बांग्ला, उर्दू आदि झारखण्ड में अधिक बोली जानेवाली भाषाएँ हैं।