Sunday, 29 August 2021

भूगर्भिक संरचना (Geography)

 झारखण्ड राज्य की भूगर्भिक संरचना (Geological structure) में प्राचीनतम आर्कियन कालीन चट्टानों से लेकर नवीनतम चतुर्थकल्पकालीन जलोढ़ निक्षेपण तक पाये जाते हैं। झारखण्ड की भूगर्भिक संरचना का कालक्रमानुसार विवरण इस प्रकार है


1. ऑर्कियन ग्रेनाइट नीस एवं धारवाड़ की चट्टानें इन्हें पैतृक चट्टान कहा जाता है, जो झारखण्ड के लगभग 90% क्षेत्र में मौजूद है। ग्रेनाइट चट्टानें कहीं कहीं नीस में बदल गई हैं। आर्कियन काल से ही इस तरह की चट्टानें यहाँ हैं। ये परतवाली चट्टानें पूर्वी व पश्चिमी सिंहभूम सरायकेला, सिमडेगा एवं झारखण्ड के दक्षिण-पूर्वी भाग में हैं। ये चट्टानें आर्थिक दृष्टि से सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण हैं क्योंकि इनमें प्रचुर मात्रा में खनिज मिलते हैं।


2. विध्यन श्रेणी चट्टानें इनमें बलुआ पत्थर व चूना पत्थर पाया जाता है। इनमें भी परतें होती हैं। ऐसी चट्टानें गढ़वा जिले के उत्तरी भाग में हैं। 3. गोंडवाना श्रेणी की चट्टानें: दामोदार घाटी के तलछट से बनी इन चट्टानों में बलुआ


पत्थर व कोयले की परतें होती हैं। जब भूखण्डों का विचलन होता है उनके बीच की भूमि


धंस जाती हैं और घाटी का निर्माण होता है। उत्तरी कोयल की घाटी, गिरिडीह एवं राजमहल


की पहाड़ियों में ऐसी चट्टानें मिलती हैं। झाखण्ड के प्रमुख कोयला निक्षेपों का निर्माण इसी श्रेणी


के चट्टानों से हुआ है।


4. राजमहल ट्रैप एवं दक्कन लावा की चट्टानें लावा के बहने से राजमहल ट्रैप बना तथा रुक-रुक कर दरारों से जो प्रवाह चला उससे दक्कन लावा बना। ये ही अपक्षयित होकर लेटेराइट एवं बाक्साइट बन गए। पाट प्रदेश, साहेबगंज का उत्तर-पूर्वी भाग तथा पाकुड का पूर्वी भाग इसी जमाव का परिणाम है। पलामू, गढ़वा, लोहरदगा व गुमला को 'पाट प्रदेश' कहते हैं। इसकी ऊँचाई 900 मीटर है।


5. नवीनतम जलोढ़ निक्षेप नदी घाटी क्षेत्रों में जलोढ़ निक्षेप से निर्मित संरचना पाई जाती है। इस तरह की संरचना झारखण्ड के सीमित क्षेत्रों जैसे कि राजमहल के पूर्वी भाग, सोन घाटी, स्वर्णरेखा की निचली घाटी आदि में पाये जाते हैं।