भारतीय संविधान के प्रावधान के अनुसार झारखंड भारत संघ का एक अभिन्न अंग है। भारखंड भारत संघ का एक राज्य है। झारखंड की शासन प्रणाली भारत संघ के अन्य राज्यों । के समान है। झारखंड में संसदीय शासन प्रणाली स्थापित है।
राज्य सरकार के तीन प्रमुख अंग हैं
1 विधायिका (Legislature) : सरकार के कानून बनाने वाले अंग को 'विधायिका' कहते है। इसे 'व्यवस्थापिका' या विधान मंडल' भी कहा जाता है।
कार्यपालिका (Executive) : सरकार के कानूनों को कार्यान्वित करने वाले 'कार्यपालिका' कहते हैं।
अंग को
न्यायपालिका (Judiciary) सरकार के न्याय करने वाले अंग को 'न्यायपालिका' कहते हैं।
झारखंड की राजव्यवस्था: महत्वपूर्ण तथ्य
★ विधान मंडल का रूप
+ विधान सभा में कुल सदस्यों की संख्या विधान सभा में निर्वाचित सदस्यों की संख्या
विधान सभा में मनोनीत सदस्यों की संख्या
★ विधान सभा में स्थानों का आवंटन —
1: एकसदनात्मक (Unicameral) विधान सभा : 82 (81+1)
81
: 01 (एग्लो-इंडियन)
अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित 28 | अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित : 09/ आरक्षित 44 अनारक्षित
सामान्य वर्ग (GEN)
★ झारखंड से राज्य सभा के लिए चुने जाने वाले सदस्यों की संख्या
झारखंड से लोक सभा के लिए चुने जाने
वाले सदस्यों की संख्या लोक सभा में स्थानों का आवंटन
अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित :
सामान्य वर्ग (GEN)
* सबसे बड़ा संसदीय क्षेत्र
* सबसे छोटा संसदीय क्षेत्र
: 06
14
: 05 |
आरक्षित
01 : 08 अनारक्षित
: पश्चिमी सिंहभूम (सुरक्षित)
जिसका प्रमुख मुख्य मंत्री होता है जिसके नेतृत्व में मंत्रिपरिषद् वास्तविक अधिकार का प्रयोग संसदीय शासन प्रणाली के अंतर्गत राज्य में दो प्रकार की कार्यपालिका होती है नाममात्र की कार्यपालिका– जिसका प्रमुख राज्यपाल होता है, (b) वास्तविक कार्यपालिका— करती है। स्पष्ट है कि राज्य की कार्यपालिका का संवैधानिक प्रमुख राज्यपाल होता है जबकि वास्तविक प्रमुख मुख्य मंत्री व मंत्रिपरिषद् होता है।
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: चतरा